Wednesday, September 9, 2009

Aksh

किसी मासूम की आवाज से मैं रुकी
देखि जो मुडके तो कोई नहीं
बस एक साया धुन्दला सा
जेइसे मुझसे पूछना चाहती सवाल कई

दर्द से भरा वो चेहरा
वो कम्पते हुए हाथ
कुछ कहने की कोशिश, पर
वो लाल आँखों मैं आंसू की बरसात

कौन है वो,क्यूँ है वो
कोई साफ चेहरा क्यूँ नहीं दिखती
रत मैं,दिन मैं हर वक़्त
वो आती है और रो कर,रहती सहमी सहमी सी


दूर उससे जाने की कोशिश,
फिर न याद करने की कोशिश
लाख कोशिसो क बाद भी
दिमाग मैं रह गयी है वो अक्ष

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