तरक्की की इस राह मैं
हम कितने दूर चले आये
पीछे छुट गयी सारे एहसास
बचपन और यादें
अभी भी होती है नयी सुबह
पर बिछड़ गयी चिड़ियों चहक
अभी भी होती है शाम
पर नहीं रोते ख्याल से दोस्ती छुटने की
रास्तों से नहीं चुनते
प्यारे फूल ,पत्ते या कंकर
नहीं बनाते रेत मैं ईमारत
नहीं होती है कुछ बिछड़ने का दार
नाहीं बनाते कहानी कोई
नाही भरते रंग असमान मैं
नाही बातें करते है
हर इस ज़र्रा से,न हे कोई अपनापन
हारते हुए हालत से कितने टूट जाते हैं
हले की तरह क्यूँ नाहीं लगता ??
क्यूँ नाहीं सोचते माँ की अंचल मैं कोई
मुस्किल या मुसीबत पास नाहीं भटकता.
कल भी हल मुसीबत का
मिलते थे एक भरोषा की लहर से
आज मुसीबतों की वजह ही
अपनों पे भरोषा है
कल एक हलकी सी मुस्कराहट से
सबको अपना बना लेते थे
अब भी मुस्कराहट अति है
तो उसके पीछे छुपि कोई कारन होती
चाहकर भी नाहीं लौटा पाती
वो बचपन के दिन
बस एक आह निकलती है
उन यादों के एहसास के बिन
हम कितने दूर चले आये
पीछे छुट गयी सारे एहसास
बचपन और यादें
अभी भी होती है नयी सुबह
पर बिछड़ गयी चिड़ियों चहक
अभी भी होती है शाम
पर नहीं रोते ख्याल से दोस्ती छुटने की
रास्तों से नहीं चुनते
प्यारे फूल ,पत्ते या कंकर
नहीं बनाते रेत मैं ईमारत
नहीं होती है कुछ बिछड़ने का दार
नाहीं बनाते कहानी कोई
नाही भरते रंग असमान मैं
नाही बातें करते है
हर इस ज़र्रा से,न हे कोई अपनापन
हारते हुए हालत से कितने टूट जाते हैं
हले की तरह क्यूँ नाहीं लगता ??
क्यूँ नाहीं सोचते माँ की अंचल मैं कोई
मुस्किल या मुसीबत पास नाहीं भटकता.
कल भी हल मुसीबत का
मिलते थे एक भरोषा की लहर से
आज मुसीबतों की वजह ही
अपनों पे भरोषा है
कल एक हलकी सी मुस्कराहट से
सबको अपना बना लेते थे
अब भी मुस्कराहट अति है
तो उसके पीछे छुपि कोई कारन होती
चाहकर भी नाहीं लौटा पाती
वो बचपन के दिन
बस एक आह निकलती है
उन यादों के एहसास के बिन
Beautiful !!!
ReplyDelete