यूँ ना पूछो क्या हुआ तुम्हें
क्यूँ तुम इतनी गुमशुम हो
होटों पे हसी क्यूँ नहीं
क्यूँ आज कम तुम चंचल हो
यूँ ना पूछो बातो की पिटारे से
सारी बाते कहा गई
बेठी हो क्यूँ बुत बनके
क्यूँ बेताबी थम गई
यूँ ना पूछो घडी की रफ़्तार तो सही
वक्त क्यूँ है थम गई
आज भी खिलते फूल है
पर खुशबू कहीं है चली गई
यूँ ना पूछो खिली धुप मे
कियो नहीं तुम चेहेकती हो
कहाँ गया वो बचपना
कियो ना करती अनबन हो
क्या दू मे ज़बाब...
क्या दू मे ज़बाब...
जो तुम्हारे हर सवाल है
तुम्हारे जाने से सब ग़ुम है
ये दर्दे दिल भी बेहाल है
क्यूँ तुम इतनी गुमशुम हो
होटों पे हसी क्यूँ नहीं
क्यूँ आज कम तुम चंचल हो
यूँ ना पूछो बातो की पिटारे से
सारी बाते कहा गई
बेठी हो क्यूँ बुत बनके
क्यूँ बेताबी थम गई
यूँ ना पूछो घडी की रफ़्तार तो सही
वक्त क्यूँ है थम गई
आज भी खिलते फूल है
पर खुशबू कहीं है चली गई
यूँ ना पूछो खिली धुप मे
कियो नहीं तुम चेहेकती हो
कहाँ गया वो बचपना
कियो ना करती अनबन हो
क्या दू मे ज़बाब...
क्या दू मे ज़बाब...
जो तुम्हारे हर सवाल है
तुम्हारे जाने से सब ग़ुम है
ये दर्दे दिल भी बेहाल है
No comments:
Post a Comment